कायस्थ समाज

कायस्थ समाज

एक गौरवशाली विरासत, एक संगठित प्रयास कायस्थ समाज भारतीय सामाजिक संरचना में एक अत्यंत महत्वपूर्ण, शिक्षित, और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जाति के रूप में सदा से प्रतिष्ठित रहा है। कलम और न्याय के क्षेत्र में कायस्थों ने भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था, कला, साहित्य, राजनीति, चिकित्सा, न्याय और व्यापार सभी क्षेत्रों में अपनी असाधारण प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। इसी महान समाज के एकीकरण और समुचित विकास के उद्देश्य से स्थापित की गई संस्था है —अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (अभाकाम)। स्थापना और विधिक स्थिति अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की स्थापना वर्ष 1887 में हुई थी, जो इसे कायस्थ…

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कलम दवात माँ सरस्वती जी पूजन

माँ सरस्वती, ज्ञान और कला की देवी, का पूजन हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कलम दवात पूजन, जो बसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है, माँ सरस्वती के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का एक विशेष अवसर है। इस दिन, विद्यार्थी, लेखक, कलाकार और ज्ञान के सभी प्रेमी माँ सरस्वती की पूजा करते हैं और उनसे ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजन विधि: कलम दवात पूजन की विधि सरल और शुभ है। पूजा के लिए, सबसे पहले एक साफ-सुथरा स्थान चुनें और उस पर एक चौकी रखें। चौकी पर माँ सरस्वती की…

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यम द्वितीया का महत्व

यम द्वितीया, जिसे भाई दूज के नाम से भी जाना जाता है, दीपावली के पांच दिवसीय त्योहार का दूसरा दिन है। यह दिन भगवान यम, मृत्यु के देवता, और चित्रगुप्त, न्याय के देवता, की पूजा के लिए समर्पित है। पौराणिक कथा: यम द्वितीया के पीछे एक पौराणिक कथा भी है। कथा के अनुसार, यमुना अपनी भाई यम से मिलने यमपुरी गई थीं। यम ने यमुना का बहुत आदर सत्कार किया और उन्हें वापस जाने का समय आने पर यमुना ने यम से वादा लिया कि वे हर साल उनसे मिलने आएंगी। तब से, यम द्वितीया के दिन बहनें अपने भाईयों…

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भगवान श्री चित्रगुप्त जी प्राकट्योत्सव

लोरेम इप्सम एक छद्म-लैटिन पाठ है जिसका उपयोग मुद्रण और टाइपसेटिंग उद्योगों में किया जाता है। 1500 के दशक के बाद से, जब एक अज्ञात प्रिंटर ने एक प्रकार की नमूना पुस्तक बनाने के लिए एक गैली टाइप किया, लोरेम इप्सम उद्योग का मानक डमी टेक्स्ट रहा है। यह न केवल पांच शताब्दियों तक जीवित रहा है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक टाइपसेटिंग में भी परिवर्तन हुआ है, जो अनिवार्य रूप से अपरिवर्तित है। इसने 1960 के दशक में लोरेम इप्सम पैसेज वाले लेट्रासेट शीट्स के रिलीज के साथ लोकप्रियता हासिल की, और हाल ही में एल्डस पेजमेकर जैसे डेस्कटॉप प्रकाशन सॉफ्टवेयर के…

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भगवान श्री चित्रगुप्त प्राकट्य

भगवान श्री चित्रगुप्त का प्राकट्य: कायस्थ समाज के आराध्य देव गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर, कायस्थ समाज अपने आराध्य देव, भगवान श्री चित्रगुप्त जी का प्रकटोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाता है। यह दिन भगवान चित्रगुप्त जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का एक विशेष अवसर होता है। पूजा विधान: इस शुभ दिन, चित्रगुप्त मंदिरों में उनका पंचामृत स्नान, श्रृंगार, हवन, आरती तथा कलम-दवात की पूजा की जाती है। भक्तगण भगवान चित्रगुप्त जी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्रों का जाप करते हैं। प्रार्थना मंत्र: श्री चित्रगुप्त जी की प्रार्थना मंत्र: मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्।…

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स्तुति एवं आरती

भगवान श्री चित्रगुप्त जी की आरती ओउम् जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे । भक्तजनों के इच्छित फल को पूर्ण करे ।। विघ्न विनाशन मंगलकर्ता सन्तन सुखदाई । भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छाई ।। रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरति, पीताम्बर राजे। मातु इरावती दक्षिण, वाम अंग साजे ।। कष्ट निवारन, दुष्ट संहारन प्रभु अन्तर्यामी । सृष्टि सम्हारन जन दुःखहारन, प्रकट हुए स्वामी । कलम-दवात शंख-पत्रिका कर में अति सोहे । बैजन्ती बनमाला, त्रिभुवन मन मोहे ।। सिंहासन का कार्य सम्हाला ब्रह्मा हरषाये । तेतीस कोटि, देवता चरणन में धाये ।। नृपति सौदास, भीष्म पितामह, याद तुम्हें कीन्हा । बेगि…

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